शिक्षा :एक जरूरत
आप हो या मैं या कोई और सब अपनी अपनी सोच रखते है।हम लोगो में से कोई डॉक्टर कोई इंजीनियर और कोई वैज्ञानिक बन जाता है वाही दूसरी और कोई बलात्कारी तो कोई चोर तो कोई और समाज को कलुषित करने वाला।यह सब परिवर्तन कैसे???। शिक्षा केवल और केवल शिक्षा ही इसका मूल कारण है।किसी को कम मिली तो किसी को ज्यादा और किसी को मिली ही नहीं। जिसको जितना मिला वो वैसे ही बन गया।शिक्षा ही संस्कार है।संस्कारो का पूर्ण आइना है शिक्षा ।चाहे वो घर में मिली हो या स्कुल की चारदीवारी में।इसका अपना महत्व होता है।लेकिन इसका भी अपना ढंग होता है यह हमेशा मानव विकास या समाज सुधार के लिए होनी चाहिए। किसी मशहूर शख्स ने कहा था की शिक्षा शेरनी के उस दूध की तरह है जिसे पीकर कोई भी दहाड़ सकता है।
अब कुछ लोगो का प्रश्न होगा की अच्छी शिक्षा मिलने के बावज़ूद भी कई लोग गलत राह पर चले जाते है तो इसके पीछे बहस करने पर कोई निष्कर्ष नहीं मिलेगा क्योंकि कई कारण हो सकते है।फिर भी अगर सही शिक्षा मिले तो अधिकाँश लोग इस तरीके की मानसिकता का शिकार होने से बच सकते है।समयाभाव के कारण यही खत्म करना पड़ेगा। मिलते है फिर तब तक के लिए ।
जय हिन्द जय भारत।
वन्देमातरम।
आप हो या मैं या कोई और सब अपनी अपनी सोच रखते है।हम लोगो में से कोई डॉक्टर कोई इंजीनियर और कोई वैज्ञानिक बन जाता है वाही दूसरी और कोई बलात्कारी तो कोई चोर तो कोई और समाज को कलुषित करने वाला।यह सब परिवर्तन कैसे???। शिक्षा केवल और केवल शिक्षा ही इसका मूल कारण है।किसी को कम मिली तो किसी को ज्यादा और किसी को मिली ही नहीं। जिसको जितना मिला वो वैसे ही बन गया।शिक्षा ही संस्कार है।संस्कारो का पूर्ण आइना है शिक्षा ।चाहे वो घर में मिली हो या स्कुल की चारदीवारी में।इसका अपना महत्व होता है।लेकिन इसका भी अपना ढंग होता है यह हमेशा मानव विकास या समाज सुधार के लिए होनी चाहिए। किसी मशहूर शख्स ने कहा था की शिक्षा शेरनी के उस दूध की तरह है जिसे पीकर कोई भी दहाड़ सकता है।
अब कुछ लोगो का प्रश्न होगा की अच्छी शिक्षा मिलने के बावज़ूद भी कई लोग गलत राह पर चले जाते है तो इसके पीछे बहस करने पर कोई निष्कर्ष नहीं मिलेगा क्योंकि कई कारण हो सकते है।फिर भी अगर सही शिक्षा मिले तो अधिकाँश लोग इस तरीके की मानसिकता का शिकार होने से बच सकते है।समयाभाव के कारण यही खत्म करना पड़ेगा। मिलते है फिर तब तक के लिए ।
जय हिन्द जय भारत।
वन्देमातरम।
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